सारंगढ़। एक तरफ भारत सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय पेट्रोल-डीजल का कम उपयोग करने और सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करने का आदेश दे रहे हैं, वहीं सारंगढ़ के आदर्श पेट्रोल पंप में नियम-कानून को ताक पर रख दिया गया। 15 मई की रात 12 बजे के बाद तक पंप मालिक खुद खड़े होकर प्लास्टिक के डिब्बे, ड्रम और कैन में धड़ल्ले से डीजल बंटवाते रहे।

सरकार कहती है ‘कम उपयोग करो’,
यहां हो रही ‘खुली लूट’
भारत सरकार लगातार ईंधन बचत का संदेश दे रही है। साथ ही विस्फोटक अधिनियम 1884 और पेट्रोलियम नियम 2002 के तहत साफ आदेश है कि पेट्रोल-डीजल केवल वाहनों की टंकी में या अनुमोदित धातु के कंटेनर में ही दिया जाए। प्लास्टिक डिब्बे में देना आग लगने के खतरे और कालाबाजारी के कारण पूरी तरह प्रतिबंधित है।
लेकिन आदर्श पेट्रोल पंप पर सरकार के इस सख्त आदेश की धज्जियां उड़ती दिखीं। रात 9 बजे से 12 बजे तक सैकड़ों लोग 20-50 लीटर के प्लास्टिक ड्रम लेकर लाइन में लगे रहे और पंप मालिक की मौजूदगी में डीजल भरा गया।
‘फुल एक्शन’ में दिखे पंप मालिक
वायरल तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि पंप के नोजल के पास भारी भीड़ है। लोग हाथों में नीले-पीले ड्रम लिए खड़े हैं। आरोप है कि खुद पंप मालिक मौके पर मौजूद रहकर स्टाफ से डिब्बों में डीजल भरवा रहे थे। न कोई टोकने वाला, न रोकने वाला।

सुरक्षा गई तेल लेने, कालाबाजारी की आशंका तेज
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्लास्टिक डिब्बे में डीजल ले जाना बम लेकर चलने जैसा है। जरा सी चिंगारी से पूरा इलाका आग की चपेट में आ सकता है। आशंका है कि खरीफ सीजन से पहले डीजल की जमाखोरी और कालाबाजारी के लिए यह खेल चल रहा है।
खाद्य विभाग–सुरक्षा एजेंसी कहां?
रात 12 बजे के बाद भी खुले डिब्बों में डीजल बंटता रहा, लेकिन जिला खाद्य अधिकारी, नाप-तौल विभाग या पुलिस की टीम मौके पर नहीं पहुंची। सवाल उठ रहा है कि क्या आदर्श पेट्रोल पंप को नियम तोड़ने का लाइसेंस मिला हुआ है?
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