दो कमरों के स्कूल में 35 बच्चों की पढ़ाई हाल के ज़मीन पर बैठ रहे नादान भगवान भरोसे, जर्जर छत, बंद बाथरूम और खराब हैंडपंप से परेशान विद्यार्थी

बिलाईगढ़। जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ के विकासखंड बिलाईगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत चारपाली के आश्रित ग्राम रनकोट स्थित प्राथमिक शाला में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली का मामला सामने आया है। यहां कक्षा पहली से पांचवीं तक करीब 35 बच्चे अध्ययनरत हैं, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय में नियमित एवं व्यवस्थित पढ़ाई नहीं हो पा रही है। स्थिति यह है कि कई बच्चों को अपने शिक्षक का नाम तक ठीक से मालूम नहीं है।
ग्रामीणों के अनुसार विद्यालय में रतन कुर्रे एवं सी.एल. भोई पदस्थ हैं। वहीं बच्चों को पढ़ाने के लिए गोपी साहू नामक व्यक्ति के वेतनभोगी के रूप में कार्य करने की बात सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि गोपी साहू की शैक्षणिक योग्यता एवं नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर भी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। आरोप है कि विद्यालय में पहुंचने का समय भी नियमित नहीं है और कभी-कभी सुबह 10 बजे पहुंच 12 बजे चलें जाते है
कभी शिक्षक तो कभी बच्चे लेते हैं अटेंडेंस!
बच्चों और ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय में उपस्थिति दर्ज कराने की व्यवस्था भी नियमित नहीं है। कभी अटेंडेंस शिक्षक द्वारा ली जाती है तो कभी बच्चों से ही उपस्थिति लेने की बात सामने आती है। ग्रामीणों के मुताबिक कई बार वेतनभोगी कर्मचारी बच्चों से यह कहकर स्कूल से चले जाते हैं कि “खाना खा लेना और घर चले जाना।” इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की बात कही जा रही है।
जर्जर छत के नीचे पढ़ने को मजबूर बच्चे

विद्यालय भवन की हालत भी चिंताजनक बताई जा रही है। जर्जर छत से बारिश के दौरान पानी टपकता है। छत को पॉलिथिन से ढकने के बावजूद पानी रिसने की स्थिति बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि भवन की हालत ऐसी है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
दो क्लासरूम, फिर भी बच्चे हाल ज़मीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर

विद्यालय में दो कमरे होने के बावजूद बच्चों को हाल में दरी बिछाकर बैठने और स्वयं पढ़ाई करने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि पर्याप्त शिक्षक व्यवस्था नहीं होने के कारण छोटे-छोटे बच्चों की पढ़ाई भगवान भरोसे चल रही है।
न हैंडपंप की सही व्यवस्था, न बाथरूम खुला

स्कूल में पेयजल की व्यवस्था भी बदहाल बताई जा रही है। विद्यालय परिसर में एक हैंडपंप है, लेकिन वह भी ठीक से काम नहीं करता। वहीं स्कूल का बाथरूम लंबे समय से बंद है और उसमें ताला लगा हुआ है। इसके चलते विद्यार्थियों, विशेषकर छोटे बच्चों को शौच के लिए खुले में जाने की मजबूरी होने का आरोप ग्रामीणों ने लगाया है।
बारिश में नाला बनता है बच्चों के लिए रास्ते की सबसे बड़ी बाधा
विद्यालय तक पहुंचने वाले रास्ते में नाला होने के कारण बरसात के दिनों में बच्चों की परेशानी और बढ़ जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि नाले पर पुल या सुरक्षित आवागमन की समुचित व्यवस्था नहीं है। बारिश में पानी बढ़ने पर स्कूल तक पहुंचने का रास्ता बाधित हो जाता है, जिससे बच्चों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े होते हैं।

योजनाएं कागजों में, रनकोट स्कूल में हालात जस के तस!
सरकार द्वारा स्कूलों में पेयजल, शौचालय, भवन मरम्मत और बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इसके बावजूद रनकोट के इस स्कूल में पुराने हैंडपंप, बंद बाथरूम, जर्जर भवन और शिक्षकीय व्यवस्था की बदहाली सामने आना जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
विद्यालय के प्राचार्य/प्रधानपाठक कार्यालय में निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत लगाए जाने वाले छायाचित्रों को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार विद्यालय के कार्यालय में महात्मा गांधी की तस्वीर भी सम्मानजनक स्थिति में नहीं है। इसके अलावा निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार डॉ. भीमराव आंबेडकर, भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, छत्तीसगढ़ के राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं छत्तीसगढ़ महतारी के छायाचित्र भी कार्यालय में दिखाई नहीं दे रहे हैं। इससे विद्यालय प्रबंधन द्वारा शासकीय कार्यालयों में लागू प्रोटोकॉल के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

पहले भी उठ चुका है मामला, फिर भी जिम्मेदार क्यों मौन?
ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय की बदहाल स्थिति को लेकर पहले भी समाचार पत्रों एवं यूट्यूब के माध्यम से मामला सामने आ चुका है। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों की जानकारी में होने के बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। ग्रामीण अब सवाल उठा रहे हैं कि आखिर बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा से जुड़े इस मामले में जिम्मेदारी किसकी है?

बड़ा सवाल — इस बदहाल शिक्षा व्यवस्था का जिम्मेदार कौन?
बच्चो के भविष्य से जुड़े इस मामले में अब देखने वाली बात होगी कि शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी विद्यालय का निरीक्षण कब करते हैं और जर्जर भवन, शिक्षक व्यवस्था, पेयजल, शौचालय तथा स्कूल तक पहुंचने के रास्ते की समस्या का समाधान कब होता है।
ग्रामीणों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, विद्यालय में नियमित शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए तथा बच्चों की सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं की तत्काल व्यवस्था की जाए।
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