सारंगढ़-बिलाईगढ़। जिले के उप तहसील कोसीर में कोटवार नियुक्ति को लेकर विवाद सामने आया है। आरोप है कि एक कोटवार परिवार को नियमों की जानकारी दिए बिना पद से त्यागपत्र दिलवाकर संवैधानिक प्रावधानों को दरकिनार करते हुए दूसरे व्यक्ति की नियुक्ति कर दी गई।
मामला ग्राम कोसीर का है, जहां लगभग 7 हजार की आबादी वाले गांव में अमर दास मानिकपुरी (72 वर्ष) लंबे समय से कोटवार के पद पर कार्यरत थे। वृद्धावस्था और लकवा की बीमारी के कारण वे शारीरिक रूप से कमजोर हो चुके थे। बताया जाता है कि 18 अगस्त 2025 को उन्होंने तहसीलदार को पत्र लिखकर अपनी अस्वस्थता का उल्लेख किया था। पत्र में उन्होंने कहा था कि उनके बड़े पुत्र मिश्वरी दास मानिकपुरी उनकी अनुपस्थिति में कोटवारी कार्यों का निर्वहन करते हैं तथा उप तहसील में हाजिरी भी लगाते हैं।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि इस पत्र के आधार पर अमर दास से त्यागपत्र तो ले लिया गया, लेकिन उनके पुत्र को पद का उत्तराधिकारी बनाने के बजाय पद को रिक्त बताकर 13 अक्टूबर 2025 को उप तहसील कोसीर द्वारा विज्ञापन जारी कर अन्य व्यक्ति की नियुक्ति कर दी गई। नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के कुछ समय बाद अमर दास मानिकपुरी का निधन हो गया।
परिवार का कहना है कि छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 183(3) के अनुसार कोटवार की मृत्यु अथवा पदत्याग की स्थिति में उसकी सेवा भूमि और पद का अधिकार विधिक उत्तराधिकारी को दिए जाने का प्रावधान है। इसके बावजूद उनके बड़े पुत्र को नियुक्ति नहीं दी गई।
मामले को लेकर जिले के विभिन्न क्षेत्रों के कोटवारों ने भी पीड़ित परिवार के समर्थन में आवाज उठाई है। कोटवार संघ के प्रतिनिधियों और परिवार के सदस्यों ने कलेक्टर से मुलाकात कर मिश्वरी दास मानिकपुरी को कोटवार पद पर नियुक्त करने तथा पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या निर्णय लेता है और पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाता है या नहीं।
